ईरान के राजनीतिक क्षितिज पर इस वक्त एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। न्यूयॉर्क पोस्ट की एक विस्फोटक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई के 'अंडरग्राउंड' होने के बाद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने देश की सत्ता पर पूरी तरह कब्जा कर लिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि IRGC के चीफ कमांडर अहमद वाहिदी अब ईरान के वास्तविक शासक हैं और सभी रणनीतिक फैसले वही ले रहे हैं।
सत्ता पर कब्जे के तीन बड़े सबूत
ईरान के भीतर मसूद पेजेशकियान की चुनी हुई नागरिक सरकार और सेना के बीच दरार अब खुलकर सामने आ गई है:
- वार्ता दल में फेरबदल: 'इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर' (ISW) के मुताबिक, पाकिस्तान में होने वाली शांति वार्ता के लिए वाहिदी ने आखिरी वक्त पर उदारवादी नेताओं को हटाकर बाघेर कानी जैसे कट्टरपंथियों को शामिल करवाया।
- होर्मुज विवाद: विदेश मंत्री अब्बास अराघची द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के सार्वजनिक ऐलान को IRGC ने ठुकरा दिया। वाहिदी के नेतृत्व में रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अराघची की योजना को दरकिनार करते हुए समुद्री मार्ग पर कड़ा नियंत्रण जारी रखा है।
- बदले की घोषणा: जबकि इस्लामाबाद में दूसरे दौर की बातचीत प्रस्तावित है, वाहिदी ने स्पष्ट कर दिया है कि IRGC अपने जहाज पर हुए हमले का बदला लेकर रहेगी, जिससे सीजफायर टूटने की कगार पर है।
कौन हैं अहमद वाहिदी?
1958 में जन्मे अहमद वाहिदी (असली नाम वहीद शाहचेराघी) 1979 की क्रांति के समय से ही कट्टरपंथी विचारधारा के स्तंभ रहे हैं। दिवंगत कासिम सुलेमानी के करीबी माने जाने वाले वाहिदी ने 'कुद्स फोर्स' में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वर्तमान में उन्होंने नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के चीफ बाघेर जोलघाद्र के साथ हाथ मिला लिया है, जिससे ईरान की निर्वाचित सरकार पूरी तरह शक्तिहीन हो गई है।
जानकारों का मानना है कि वाहिदी का उदय न केवल ईरा